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फूल चंपा के महकते

 

 
फूल चंपा के महकते जा रहे हैं
नेह के बादल बरसते जा रहे हैं

ओढ़ हरियाली चुनर के आवरण में
फूल चाँदी से चमकते जा रहे हैं

पीत आभा ले खिले हैं श्वेत चंपा
सीप में मोती मटकते जा रहे हैं

देव पूजा को सजे हैं देव मंदिर
हार चंपा से सँवरते जा रहें हैं

श्वेत फूलों में जड़े ज्यों स्वर्ण तारे
भव्यता से ही दमकते जा रहे हैं

ताज़गी का सबब बनते ओस के कण
स्वर्ण चंपा से टपकते जा रहे हैं

-सुरेन्द्रपाल वैद्य
१ जुलाई २०१३

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