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कौन तुम हरसिंगार

 

कौन तुम हरसिंगार ?
धरती सुत ?
स्वर्ग सुत ?
या फिर
सगर मंथन की झार
कौन हो हरसिंगार ?

रात भर करते हो
धरती का श्रृंगार
और
दिनकर की प्रथम किरण के
स्पर्श से पहले ही
सिमट जाते हो लज्जा से
बंद कर सुगंध द्वार
कौन हो, कौन हो हरसिंगार ?

कहते हैं लाए थे
कृष्ण तुम्हें
इंद्र के कुंज से
और कर दिया था आरोपित
सत्यभामा के उपवन में
पर तुम
महकाते रहे
रुकमणी के भी आँगन द्वार।

स्वागत है हरसिंगार
परियों के देश के
परिजात
इतने उदार
आए हो धरती पर
बांटने प्यार
हरसिंगार, हरसिंगार।

मधु संधु
१८ जून २०१२

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