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नव वर्ष अभिनंदन

अबके बरस

          हर तरफ़ किलकारियाँ हों कहकहे अबके बरस
प्यार की ऐसी हवा हर दिन बहे अबके बरस

सारी दुनिया में मुहब्बत की रहे दीवानगी
हम रहें सुख-चैन से दुनिया रहे अबके बरस

आदमी हर आदमी के काम आए इस तरह
जो पराया हो उसे अपना कहे अबके बरस

पेड़ से लिपटी लताएँ चैन से लिपटी रहे
गुल रहे गुलशन रहे खुशबू रहे अबके बरस

चाँदनी जैसा मज़ा आए अमा की रात में
इस तरह आँगन गली रोशन रहे अबके बरस

नफ़रतों की आग में 'घायल' कोई झुलसे नहीं
प्यार की पुरवाई सालों भर बहे अबके बरस

राजेंद्र पासवान 'घायल'
1 जनवरी 2008

  

एक बरस बीत गया

एक बरस बीत गया
झुलसाता जेठ मास
शरद चाँदनी उदास
सिसकी भरते सावन का
अंतर्घट रीत गया
एक बरस बीत गया

सींकचों में सिमटा जग
किंतु विकल प्राण विहग
धरती से अंबर तक
गूँज मुक्ति गीत गया
एक बरस बीत गया

पथ निहारते नयन
गिनते दिन पल छिन
लौट कभी आएगा

मन का जो मीत गया
एक बरस बीत गया

अटल बिहारी वाजपेयी


 

 

 
 

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