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मैं पीपल हूँ!
 

 

ढेरों मन्नतों
आस्था,विश्वासों का साक्षी मैं
माँ के मन की श्रद्धा हूँ
विश्वास हूँ प्रिया के ह्रदय का

मैं विषपायी
आठों पहर अमृत बाँटता हूँ
साँसों के लिए संजीवनी हूँ
मनौती पूरी होने पर
मेरे मन के भीतर
खिल उठते हैं फूल छिप छिप कर
इसीलिए गुह्य-पुष्पक भी हूँ

मैं पीपल हूँ
सिहरता हूँ प्रतिपल बाहर से
पर भीतर-भीतर खिलता हूँ मैं।

सविता मिश्रा 
२६ मई २०१४

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