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पीपल वाला गाँव
 
 
किसकी बर्बादी हुई, कौन हुआ आबाद
पीपल करता रातभर, पत्तों से संवाद

पीपल त्रिपिटक बाँचता, पीपल गाता गीत
पीपल सबको बाँटता, साँसों का संगीत

पीपल जब-जब चुप हुआ, तब-तब पसरा मौन
बूढ़े वृक्षों की व्यथा, आखिर समझे कौन

चिड़ियों को आश्रय मिले, राहगीर को छाँव
भारत की पहचान हैं, पीपल वाले गाँव

पीपल उगता हर जगह, छत हो या दीवार
ऐसे औघड़ सन्त को, कौन सकेगा मार

बन बुजुर्ग करता रहा, पीपल हमसे प्यार
खड़ा गाँव के छोर पर, बनकर पहरेदार

जेठ तपा जब शीश पर, लगे झुलसने पाँव
रह रह आया याद तब, पीपल वाला गाँव

पीपल के नीचे मिला, बड़े बड़ों को ज्ञान
गीता में भी कृष्ण ने, इसको कहा महान

-डा० जगदीश व्योम
२६ मई २०
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