अंजुमनउपहारकाव्य संगमगीतगौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहे पुराने अंक संकलनअभिव्यक्ति कुण्डलियाहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतर

पीपल देख रहा
 

माँ का आँचल शीतल,
पीपल देख रहा
मौन तपस्वी अविचल, पीपल देख रहा

शरद, शिशिर हेमंत
ग्रीष्म वर्षा वसंत
ऋतु परिवर्तन प्रतिपल, पीपल देख रहा

कोयल की कू कू
कागा का कोलाहल
उत्पाती पक्षी दल, पीपल देख रहा

शैशव की किलकारी
यौवन की आशा
वृद्ध निराशा पल पल, पीपल देख रहा

पञ्च तत्व अग्नि तर्पण
जीवन अर्पण
मुक्त आत्मा निश्छल, पीपल देख रहा

-दिगंबर नसवा 
२६ मई २०१४

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलन हाइकु हास्य व्यंग्य क्षणिकाएँ दिशांतर समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter