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पीपल के पत्तों पर
 

पीपल के पत्तों पर फिसल रही चाँदनी

नालियों के भीगे हुए पेट पर
पास ही जम रही घुल रही
पिघल रही चाँदनी
पिछवाड़े बोतल के टुकड़ों पर--
चमक रही दमक रही
मचल रही चाँदनी
दूर उधर बुर्जों पर उछल रही चाँदनी

आँगन में दूबों पर गिर पड़ी--
अब मगर किस कदर
सँभल रही चाँदनी
पिछवाड़े बोतल के टुकड़ों पर
नाच रही कूद रही उछल रही चाँदनी
वो देखो सामने
पीपल के पत्तों पर फिसल रही चाँदनी

-नागार्जुन
२६ मई २०१४

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