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देवता हो गया
 

 

पूजा गया देवता हो गया
मन्नत में सबकी दुआ हो गया

पीपल ने हमको दुलारा है यों
यादों में मेरे पिता हो गया

साझा जो करता था बातें सभी
पीपल भी हमसे जुदा हो गया

जुगनू की चादर को ओढ़े हुए
खुश जो हुआ तो हवा हो गया

चिड़ियों से रौनक थी जिसकी कभी
गुमसुम वही गमजदा हो गया

लचारगी ऐसे बढ़ती गई
सोचा था क्या और क्या हो गया

पूजा की थाली में रोली अक्षत
उस पर चढ़ाया दुआ हो गया

गाँवों बसती है जिसकी महक
पीपल हमारी अना हो गया

रातों में पीपल पे भूतों का घर
दिन में वही देवता हो गया 

-संजू शब्दिता
२६ मई २०
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