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पवित्र पीपल
 

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कष्टों से छुटकारा पाते जिसकी पूजा करते हैं हम।
उस पीपल की आज उपेक्षा फिर कैसे सह लेते हैं हम।

तपती दोपहरी में शीतलता का यह आभास कराता।
इसकी छाया में सुख के अनगिन सपनों को बुनते हैं हम।

बेटों के सुखमय जीवन हित माता ने जिसकी पूजा की।
उस पवित्र पीपल के सम्मुख नतमस्तक हो जाते हैं हम।

भौतिकता का जीवन दर्शन आज पड़ा कुदरत पर भारी।
पेड़ कटे तो इस धरती पर साँस नहीँ ले सकते हैं हम।

पीपल के साये में खुद को पहचाना ऋषियों मुनियों ने।
आज पुनः प्रकृति रक्षा कर मानव धर्म निभाते हैं हम।

हर प्राणी का जीवन संभव शुद्ध हवा पानी के कारण।
जीवन भर पेड़ों से सब कुछ लेते ही तो रहते हैं हम।

सुन्दर पंछी कलरव करते पीपल पर आकर बस जाते।
सूर्योदय होते ही उनको दूर गगन में पाते हैं हम।


--सुरेन्द्रपाल वैद्य
२६ मई २०
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