अदरख वाली चाय

 

 
वही पुरानी
सुबह शाम की
एक कहानी
अदरख वाली चाय!!

दादा जी हैं एक अकेले
पूरे घर में
जिनको चाय न भाती
अंग्रेजों की देन कहाती
चाय बिचारी
रोज गालियाँ खाती

पर दादी को
बड़े प्यार से
उन्हें पिलानी
नींबू वाली चाय!!

बेमौसम की बारिश सी है
तलब चाय की
फिर-फिर है जग जाती
कभी समोसा कभी पकौड़ी
की फरमाइश
संग-साथ में लाती

मजा दोगुना
तब जब हो
तंदूरी छानी
कुल्हड़ वाली चाय!!

घर से दूर हुए हैं जबसे
मिला न तबसे
दाल-रोटी खाना
पिज्जा बर्गर भुजिया बिस्किट
या फिर होता
मैगी कभी बनाना

पर अक्सर ही पी लेते हैं
हम सैलानी डिप-डिप वाली चाय!!

- आभा खरे
१ जुलाई २०२०

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