इन दिनों सड़कें

 

 
इन दिनों सड़कें
बहुत आराम में हैं!

तेज़ हूटर-
सायरन का शोर ओढ़े
करवटें लेती हुईं
कुछ पाँव मोड़े

सोच-चिन्ता तप कि-
प्राणायाम में हैं

देह पर साटों पड़ी
पहचान बनकर
हँस रहीं कटता हुआ
चालान बनकर

आजकल पाला बदल
हुक्काम में हैं

आईनों-परछाईंयों पर
तंग जाले
दिन गये हाथों कढ़े
रूमाल वाले

भर रहीं गहरी
चुभन सी शाम में हैं

- शुभम् श्रीवास्तव ओम
१ जून २०२०

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