अंजुमनउपहारकाव्य संगमगीतगौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहे पुराने अंक संकलनअभिव्यक्ति कुण्डलियाहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतर

मेरा भारत 
 विश्वजाल पर देश-भक्ति की कविताओं का संकलन 

 

मातृ भू कैसे करें तुझको नमन

मातृभू कैसे करें तुझको नमन!
हैं अधूरे ही पड़े तेरे सपन!

द्वार पर तेरे जले कितने दिए,
लाल थे तेरे, जिये तेरे लिए,
बुझ गये दे भी न पाये हम कफ़न!
मातृभू कैसे करें तुझको नमन!

नीर भोजन चीर तेरे भोगते,
गर्भ में तेरे खजाने खोजते,
कर चले हम स्वार्थ में ममता दफ़न!
मातृभू कैसे करें तुझको नमन!

हम पले जिस छत्र से आँचल तले,
आज उसमे छिद्र कितने हो चले,
देख कर भी मूँद लेते हम नयन!
मातृभू कैसे करें तुझको नमन!

एक माटी का पतन-उत्थान क्या,
विश्व में उसकी भला पहचान क्या,
अस्मिता जिसकी कुचालों के रहन!
मातृभू कैसे करें तुझको नमन!

घूँट पी अपमान का जीना वृथा,
आन पर मरना भला है अन्यथा,
हो सृजन संकल्प या नीरव हवन!
मातृभू कैसे करें तुझको नमन!

-ओम नीरव
१२ अगस्त २०१३


इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलन हाइकु हास्य व्यंग्य क्षणिकाएँ दिशांतर समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter