जीवन की आपाधापी में 

 
जीवन की आपाधापी में
फुरसत के लम्हों का संगम

सोंधी ख़ुशबू
अरमानों की
मिली चाय की इक प्याली में
सपनों की हो थोड़ी शक्कर
मीठा हो थोड़ा सा कम कम

मीठी स्मृतियाँ
निमकी बातें
झाल कुरकुरे जैसे कुछ पल
इंतज़ार की लम्बी चुस्की
साथ तुम्हारा ऐसा हमदम

धूप गुनगुनी
छाया अनमन
लुकती-छुपती शाम-सहेली
याद किसी की भीनी-भीनी
भाप चाय सी महके हरदम

- मानोशी
१ जुलाई २०२०

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