चलो साथी दीप बालो

 

 
चलो साथी
दीप बालो

आसुरी शक्तियों ने
फिर से रचा षड़यंत्र भीषण
घुला विष हवाओं में है
हर पल यहाँ इति का निमंत्रण
बाती बनाओ घृत-तेल डालो
चलो साथी
दीप बालो

हम करेंगे संहार
अपने शत्रु का लेंगे जीत रण
अपेक्षित संग सबका
सम्भव है यहाँ श्वासों का वरण
उर में अलौकिक संकल्प पालो
चलो साथी
दीप बालो

- डॉ शैलेश गुप्त 'वीर'
१ जून २०२०

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