QaUp ko paMva

 

ABaI saUrja  

fja,la taibaSa  

 

 

ABaI saUrja dr#taoM maoM iCpa hO
magar saayaa ja,maIM pr Aa igara hO.

ja,maIM sabakao inagalatI jaa rhI hO
ja,maIM Saayad ja,maanao kI Kuda hO.

hvaa mauJakao BaI [k idna jaIt laogaI
jahaŠ maaŠ ka badna qaa Aba hvaa hO.

AnQaoro ko ilae AaŠKoM nahIM hO
yahaŠ baoAaŠKhI kuC saUJata hO.

tumharo AaOr maoro ga,ma Alaga hOM
magar KalaI idKavaa BaI Balaa hO.

       ³ 'AjanabaI nahIM' sao“  

 

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। कविकाव्य चर्चा काव्य संगम किशोर कोना गौरव ग्राम गौरवग्रंथ दोहे रचनाएँ भेजें
नई हवा
पाठकनामा पुराने अंक संकलन हाइकु हास्य व्यंग्य क्षणिकाएँ दिशांतर समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।