मातृभाषा के प्रति


कुछ छोटी कविताएँ

हिन्दी भाषा समृद्ध सुहासी
लोक भाषाओ की
हमजोली साथी
हर रंग, हर भाव समाती
लहराती, दमकती
जन जन
के मन की सहज भाषा बन जाती।



सृजनकारों के हाथों
सज सँवर कर आती
मंत्र मुग्ध करके
मनो भावों की पाती बन
सृजन गाथा सुनाती
मन भावनी
बोली हिन्दी बन जाती

--अर्चना ठाकुर

हिन्दी दिवस पर
हम सब ले यह प्रण
हिन्दी की बिंदी को
दें हम प्राण
जान ले इसे सारा संसार
करें हम सभी मिलकर
इसका प्रसार

-मीरा ठाकुर
१० सितंबर २०१२

 

 

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