हिन्‍दी अपनी शान

हिंदी में हम पले बढ़े
हिंदी ही अपनी शान है
विश्व भी हिंदीमय होगा
संकल्पित हिंदुस्तान है

कबिरा के दोहे हैं इसमें
सूरदास की पदावली
तुलसी की चौपाई प्यारी
लगती हमको बहुत भली

प्रेमचंद की किस्सागोई
पर हमको अभिमान है

मातृभाषा है यह मेरी
मन पुलकित हो इठलाता है
जिसके मुख से हिंदी निकले
वह जन हमको भाता है

दुनिया में हम कहीं रहें
हिंदी अपनी पहचान है

- अमित वागर्थ   
१ सितंबर २०१५

 

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