होली
है
!!

 

दिन हुरियारे आए


साँझ चंदनियाँ
मोर किरनियाँ
दिन हुरियारे आए।

पीतझरे,
नव पल्लव पुलके
वन बैठे बन ठन के
चली बयार कुनकुनी पछहीं
दिन आए फागुन के
ओठनगनियाँ
रूप रतनियाँ
दिन हुरियारे आए।

महुआ महके
किंशुक दहके
पंख उड़ी कचनारें
रंग-अबीर-गुलाल उड़ाते
मेघ झरें रस धारें
मृग लोचनियाँ
पारस मनियाँ
दिन हुरियारे आए

काले चेहरे
मैले दामन
सबरंग में डूबेंगे
अंग-अंग से चटक प्यार के
झरने फिर फूटेंगे
गरब नचनियाँ
तन पल-छिनियाँ
दिन हुरियारे आए।

यतीन्द्र राही
९ मार्च २००९

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