उत्सव छाया

 

 
माह कार्तिक है मुस्काया
त्योहारों ने रंग जमाया
उत्सव छाया

मौसम ने हौले से करवट है बदली
आई शरद ऋतु महके उठी संदली
पर्वों की रंगत है सभी ओर छायी
दशमी दीवाली ने धूम है मचाई

कंदीलों का मौसम आया
उत्सव छाया

चंदा निहारेंगे करवा के व्रत में
पूजेंगे सूरज को मिलकर हम छठ में
बालेंगे दीपक को तुलसी के चौरे पर
भोग लगायेंगे गंगा के तट में

श्रद्धा का सागर लहराया
उत्सव छाया

- मंजू सक्सेना
१ नवंबर २०२५

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