पिता की तस्वीर
पिता को समर्पित कविताओं का संकलन

 

पिता की नींद

रात में ज़रा-सी आवाज़ से
टूटती है नींद पिता की
वे झुँझलाते नहीं हैं किसी पर
चुपके से उठते हैं
निकलते हैं घर से बाहर
देखते हैं सब तरफ ठीक तो है
पिता चौकन्ना होते हैं
सोचता हूँ
जब पिता नहीं होंगे
कौन रहेगा चौकन्ना
और फिर मुझे
पिता की ही तरह
रात भर नींद नहीं आती

- हर गोविंद पुरी


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