लोगे कब अवतार

 
कब से पुनः प्रतिक्षित हो
राम जगत आधार
दुर्जन की भरमार हुई
लोगे कब अवतार

अज्ञान पंडित हो गया
आस्था खंड़ित हुई
दानवी सघन अरण्य में
निष्ठा दंडित हुई
कितना और सहे धरणी
पाप वृष्टि का भार
प्रलय पूर्व ही आ जाना
लेकर फिर अवतार

प्रतीक्षारत है शबरियाँ
अछल स्नेह स्पर्श की
अहिल्याएं फिर स्तब्ध सी
चाह ले उत्कर्ष की
भारत माँ के आँचल में
गुपचुप सिसके नार
रक्षक बन फिर आ जाना
लेकर तुम अवतार
-
मानव रूप धरे दानव
निरंकुश घूम रहे
कुचक्रों का षड़यंत्र सजा
निवाले ढूंढ़ रहे
करने इनका आ जाना
छिन्न भिन्न संसार
लोकतंत्र का प्रहरी बन
लेकर तुम अवतार

- ओम प्रकाश नौटियाल 
१ अप्रैल २०१९२२ अप्रैल २०१३

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