आओ राजा राम

 
दुनिया से फिर पाप मिटाने
आओ राजा राम
सबके मन की पीर हरो फिर
ढले न सुख की शाम

कभी अयोद्ध्या कभी द्वारिका
टेक रहें वे माथा
इसकी टोपी उसके सिर पर
कलयुग की नव गाथा
घूम रहे सड़को पर रावण
मचा हुआ कुहराम

देव धरम के नाम बाँटते
द्वेष भरी सौगातें
वेद पुराणों की महिमा है
बीते कल की बातें
नफरत की दीवार उठाते
ये आतंकी धाम

डोल गया ईमान जगत में
वैभव की अभिलाषा
चौराहे पर नग्न खड़ी है
नेकी की परिभाषा
अहंकार का बीज मिटाना
संयम का पैगाम

- शशि पुरवार  
१ अप्रैल २०१९२२ अप्रैल २०१३

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