दोहों में राजा राम

 
  चैत्र शुक्ल नवमी दिवस, जन्म हुआ श्री राम
बजे बधावे जगत में, धूम मची भू धाम

अवध महल में है जने, कौशल्या ने लाल
दशरथ बाँटे अशरफी, हुई अवध खुशहाल

कुल गुरु वशिष्ठ ने पढ़े, वेदों के शुभ मंत्र
मंगल ध्वनियों से ध्वनित, सकल सृष्टि का तंत्र

राम भक्त विजयी हुए, जीत राम की जंग
बाँटी खुशियों ने तभी, खूब मिठाई रंग

गले लगाया राम ने शोषित शबरी जात
खाए झूठे बेर सब, की समता की बात

कितना सच्चा शुद्ध है, सुमिरन प्रभु का नाम
अर्थी उठने पर कहें, राम-राम श्री राम

पड़ा शिला पर पैर था, जब वन में थे राम
शीश नवा नारी उठी, साँस चली अविराम

मनचाहा फल है मिले, जो जपता श्री राम
खुल जाता है भाग्य तब, भजता जो प्रभु नाम

मरा-मरा को था जपा, वाल्मीकि अज्ञान
राम कृपा से लिख दिया, रामायण में ज्ञान

जिस दिल में प्रभु हैं बसे, होता उधर उजास
भक्ति-भाव अरु प्रेम का, रहता सदा निवास

पाँव पसारे जगत में, कोरोना का रोग
शरण तुम्हारे राम जी, चढ़े भक्ति का भोग

- डॉ मंजु गुप्ता
१ अप्रैल २०२०

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