सोन चिरई आई है

सोन चिरई आई है
अमुआ की डार पर
सावन के झूले कहीं
ओर डारना

माई जा आँगन में
याद तुम्हारे सँग की
भैया की काका की
दादी के जीवन की
आऊँ मैं बार बार

बातें सुन ले मन की
घर की दीवारों की
यादें हैं जन जन की
न हों तार तार

हौले हौले बुहारना
अरजी है मेरी यही
सावन के झूले
द्वार द्वार डालना

- कमलेश कुमार दीवान
९ अगस्त २०२०

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