घिर-घिर आई कारी बदरिया

घिर-घिर आई रे कारी बदरिया
रसभरी बदरी छाई
रिमझिम रिमझिम मेघा बरसे
पद पायल खनकाई

कुहू कुहू बोले रे काली कोयलिया
पपीहा टेर लगाई
मोर मोरनी कानन नाचे
देखत मन हर्षाई

सब के पिया परदेश गए हैं
संदेसवा नहीं आई
हमारे पिया सावन में पधारे
सखियां देत बधाई

हरी हरी चूड़ियां खनखन खनके
धानी चुनर लहराई
हाथ में साजे मेंहदी बूटे
नैनन कजरा लगाई

कदम की डाली हिंडोला परयो है
हौले हौले से झुलाई
सजना हमारे पेंग बढ़ावे
जिय हमरो हुलसाई

घिर घिर आई रे कारी बदरिया
रसभरी बदरी छाई

- ऋतुप्रिया खरे
९ अगस्त २०२०

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