वसंती हवा

दो मधुमास मुक्तक
- कमल किशोर भावुक

 

1
(१)

विश्व में सबका फला विश्वास हो, ऐसा नहीं।
हर खुशी भावुक हृदय के पास हो, ऐसा नहीं।
उम्र का यह सफर जिसमें शीत, वर्षा, तपन भी,
ज़िंदगी का हर दिवस मधुमास हो ऐसा नहीं।

(२)

है व्यथित विश्वास लेकिन तुम नहीं आए।
प्रेमपूरित प्यास लेकिन तुम नहीं आए।
हँस रहे हैं सुमन पुलकित वाटिका है,
आ गया मधुमास लेकिन तुम नहीं आए।

९ फरवरी २००९

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँ दिशांतरसमस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है