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अनुभूति में गौरीशंकर आचार्य ‘अरुण’  की रचनाएँ -

अंजुमन में-

 

हम समन्दर के तले है

हम समन्दर के तले हैं, दोस्तों पोखर नहीं।
हाँ नदी होकर बहे हैं, नालियाँ होकर नहीं।

जिन्दगी हमने सँवारी मौत को रख सामने,
आदमी होकर जिए हैं, जानवर होकर नहीं।

मानते हैं हम उसूलों को इबादत की तरह,
फर्ज से अपने रहे हम, बेखबर होकर नहीं।

हर बसर के वास्ते दिल से दुआ करते हैं हम,
दोस्त बनकर खुश हुए हैं, दोस्ती खोकर नहीं।

रास्ते हमने बुहारे आज तक सबके लिए,
प्यार बोकर खुश हुए हैं, झाडियाँ बोकर नहीं।

दायरे अपने सभी के हैं अलग तो क्या हुआ,
हमवतन होकर रहे हैं, हम अलग होकर नहीं।

२७ दिसंबर २०१०

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