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किशोर सर्राफ़

किशोर सर्राफ़ का जन्म 1962 में बिहार में हुआ। वे वहाँ अपने परिवार के साथ रहते हैं, व्यवसाय से व्यापारी हैं और जब कभी समय मिलता है कुछ लिख लेते हैं।

ई मेल- sujitsaraf@hotmail.com

 

किशोर सर्राफ़ की दो कविताएँ

बचपन की रुलाई

ढ़ुलक पड़े नयनों से मोती
औरों के भाव जगाने को
देश नगर नव यंत्र क्या नहीं
मेरे पास लुभाने को।

सूर्योदय के इस उलास में
असह्य मुझे इतना भी दुःख
देख तेरी थोड़ी-सी पीड़ा
विकल हो उठा मेरा मुख।

रह जाएँगी सुख-दुःख की यादें
मुझको सारा जीवन
तनिक दुःखी हो, अधिक दुःखी हो
सहना सीखेगा मन।

तुम प्यारे बचपन के साथी
तुम्हें देख होता अनुराग
प्यारे लगते पंख पखेरू
प्यारे लगते नद-बन-बाग।

 

साँझ का काजल

आसमाँ पे बिखरा साँझ का काजल
हवा में लहराया सुरमई आँचल
खामोशी में डूबी है तनहाई
मदहोश साँझ और भी गहराई
दुनिया से बेगाना ये मिलने का अंदाज़
तुम और मैं, और दिलों की आवाज़
थके-माँदे परिंदों के गीत
उन्हें मिले हैं मन के मीत
गाते हैं पेड़ चहकती है वादियाँ
महकती हैं ये तुम्हारी ज़ुल्फें जवाँ
हाथों में लेकर तुम्हारा नर्म हाथ
जी चाहता है, चलूँ उम्र भर साथ

16 मई 2007

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