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सुभाष चौधरी

जन्म-
१० जून १९६३ को मध्य प्रदेश (ज़िले के एक गाँव 'दर्जीकराड़िया') में।

शिक्षा- स्नातक (भौतिक शास्त्र)

कार्यक्षेत्र-
१९८८ से मुंबई आ कर बस गए। तब से वर्तमान तक मुंबई ही कार्यभूमि है तथा टी वी एवं फ़िल्म ही कार्यक्षेत्र है। मुंबई में सहायक संपादन एवं निर्देशन से कार्य प्रारंभ किया, साथ ही अभिनय भी करते रहे। १९९५ से स्वतंत्र निर्देशक एवं संपादक के तौर पर कार्य जारी। कई धारावाहिकों, विज्ञापन फ़िल्मों, वृत चित्रों एवं टॉक शो का संपादन एवं निर्देशन किया। वर्तमान में निर्देशन के साथ-साथ निर्माण में भी सक्रिय। जब भी थोड़ा समय मिलता है अपने प्रथम प्यार लेखन में लग जाते हैं।

ई मेल-
 subhash@yashtelefilms.com 

 

तीन छोटी कविताएँ

मौत

महज़ मरने के लिए ही पैदा हुआ होता
तो उसी दिन मर गया होता
जिस दिन पैदा हुआ था
मगर उम्मीदें, आशाएँ, आकांक्षाएँ,
मेरे अपनों की
मेरे साथ थी,
मगर रेत की दीवार की तरह
सब कुछ ढह गया
सोचता हूँ उसी दिन ही
क्यों न मर गया


डर

मैं पहले मौत से बड़ा डरता था
ज़िंदगी के लिए आहें भरता था
मगर वक्त के थपेड़ों से
काया ही पलट गई है।
और अब तो मौत भी
मरीचिका बन गई है।


उम्मीद

उम्मीद का बुलबुला
आसमान में झूलते
गुब्बारे की तरह
एक दिन
फूट ही जाता है,
तो कैसे करूँ उम्मीद
आसमानी छत की,
सफ़ेद फ़र्श की,
और उसकी
जो कभी मेरी न थी।

२४ मार्च २००६

 

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