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पुष्पगुच्छ हाथ लिये
 
 
पुष्पगुच्छ हाथ लिए
खुशी खड़ी द्वार पर

मंद-मंद मुस्काती
परियों सी-बलखाती
अलक-झलक खुशबू की
पलकों पर ले आती

प्रेम पगे बूटों को
टाँक रही हार पर

मधुवन की मीत-प्रीत
मौसम की यार है
जीवन में जीभर कर
करती उपकार है

कीचड़ से रंगत ले
महक रही पार पर

- कल्पना मनोरमा
१ जून २०१८

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