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महक उठा घर
 
 
गमले में फूल खिला
महक उठा घर

खिड़की से दबे पाँव
हवा चली आई
बाहों में भरे- भरे
ले गई हवाई
किरणों के गीत मधुर
नाचती लहर

सबकुछ मनचीता है
लगे खूब अच्छा
हँस रहा है नींद में
नन्हा- सा बच्चा
खुशियों के गाँव, छाँव
धूप बेअसर

- शशिकांत गीते
१ जून २०१८

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