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नवल किशोर बहुगुणा
के हाइकु

 

जन्म- ४ जुलाई १९८२ टिहरी गढवाल में।
शिक्षा - एम. ए. हिन्दी साहित्य तथा बी.एड. डी.ए.वी. पी.जी. कालेज देहरादून से। देहरादून में आयोजित काव्य गोष्ठियों में निरंतर पाठ तथा स्थानीय पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।

 

 

 

पेड करते
अनुलोम विलोम
संग हवा के।

मेघ बरसा
नदी को पर लगे
उडी सहसा।

बरसे घन
नदी ने तोड़ डाले
तट बंधन।

अंकुर फूटा
बंजर अधरों पे
गीत सरीखा।

डिम्ब फोड के
गहन तिमिर का
चहकी भोर ।

बीते बरस
पीते हुए गीतों का
गाजा चरस।

पंछी चहके
हरियल फुनगी
इच्छा बहके।

हुई सुबह
सृष्टि करने लगी
स्वस्तिवाचन।

निकला चाँद
गहन अंतस से
जैसे कविता।

जाडे़ की धूप
मूगफली बीनती
छत पे बैठ।

२७ अप्रैल २००९

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