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हास्य व्यंग्य में-

प्रकाश प्रलय की रचना

  मुबारक पंद्रह अगस्त

जिसको मिली कुर्सी
सिर्फ़ वही है मस्त
मुबारक पंद्रह अगस्त

पहनकर खादी
घोटालों में है व्यस्त
मुबारक पंद्रह अगस्त

पहरेदार बेहोश
चोर देते गश्त
मुबारक पंद्रह अगस्त

आज़ाद हवा में रहते
पर आज़ादी है ध्वस्त
मुबारक पंद्रह अगस्त

महंगाई के सामने
आम आदमी है पस्त
मुबारक पंद्रह अगस्त

११ अगस्त २००८

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