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गिरीश शर्मा  

जन्म- २७ नवंबर १९७६ को अमरावती, महाराष्ट्र में।
शिक्षा- कंप्यूटर में स्नातक

कार्यक्षेत्र-
साफ्टवेयर के विकास में संलग्न। हिंन्दी एवं मराठी मे कविताएँ लिखने का शौक। 

सम्प्रति-
मुंबई में साफ्टवेयर इंजीनियर



 

दोस्ती

एक दिन था हुआ करते थे जलवे भी हमारे
गर्दिश मे हमें सूझे ना हम किसको पुकारे

एक दिन था बाँध लेते थे धागे से सितारा
उम्मीद से हमने है बड़ी उनको पुकारा
दे दे गर सहारा वो हमें थाम कर बाहें
भीग जायेगी खुशी से ये खामोश निगाहें

मुकर जाये गर वो हमसे कोई कर के बहाना
कर देगा बदनाम दोस्ती को जमाना
फिर कोइ दोस्त किसी दोस्त से प्यार नही करेगा
हर आदमी दोस्ती करते सौ बार डरेगा

मेरा रंग दे बसन्ती चोला

एक वीर शहीद की माँ बोली
ले जाओ दूजे बेटे को
मैने रंग कर के तैयार किया
बसन्ती इसके फेटे को
गम ना होगा मुझको थोड़ा
गर सिर इसका कट जाये तो
भारत माँ की रक्षा करते
गर ये भी मर मिट जाये तो
मै जानू हूँ इस मिट्टी ने
जाये है ऐसे ऐसे पूत
दुश्मन को जो रणभूमि मे
करा दे याद छठी का दूध
जिसने भी माँ का दूध पिया
दुश्मन को रण मे ललकारे
ना भाड़े के टट्टू लेकर
यों पीठ मे खंजर मारे
उस मूरख को गुस्ताख को
बस एक नसीहत हम देंगे
अबके तो धूल चटायी है
फिर धूल में मिला देंगे

९ अगस्त २००२

 

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