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शत्रु

जो
धोखा न दे सके
मित्र होने का
 

 

कुंतल कुमार जैन

मित्र

जिसे पाओ तो
स्वजन परिजन और
सबके सब ज़रूरी काम छूट जाएं
अपने आप

 

जन्म

जो
नहीं को हाँ
हाँ, नहीं को
है, है और है में गतिशील कर दे
एक अनियतकाल के लिए

 

मृत्यु

जो लगातार चलते हुए को
किसी का लिहाज़ रखे बिना
नहीं, नहीं और बिलकुल नहीं में
बदल कर रख दे।

1 जून 2007

 

बिजली का बिल

बिजली का बिल पढ़ा
तो मालूम हुआ
रौशनी
पैसे दे सको तो मिलती है
फिर तत्काल दिखाई दिया मुझे
रौशनी का वस्तु में पलट जाना

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