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१- ज़िंदगी क्या एक सुलगती माचिस नही जो कुछ क्षण सुलगी और फिर बुझ गयी। 1
संगीता स्वरूप की पंद्रह क्षणिकाएँ जिंदगी
२- ज़िंदगी एक ऐसी पहेली जिसका हल ढूंढते- ढूंढते ही ख़त्म हो जाती है पर उत्तर नही मिलता।
३- ज़िंदगी शराब का जाम है जो छलक कर कुछ क्षण में खाली हो जाता है।
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