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दो क्षणिकाएँ

  १
सच कहा

सच कहा तुमने
कमल सिर्फ कीचड़ में खिलते हैं
कल ही
शहर की गन्दी बस्ती में मैंने
कमल के झुण्ड देखे थे,
हां बहुत प्यारे से बच्चे थे वो
बिलकुल कमल के फूल जैसे!

--नीलेश माथुर

२

योगी और कमल

एक योगी और
एक कमल मे
महान समता है...
एक
संसार मे रहकर भी
उसमे नहीं रमता
दूजा कीचड़ में जमकर भी
वैसा नहीं बनता.

--संस्कृता मिश्रा
२१ जून २०१०

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