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शीशम रूप तुम्हारा
 
आँधी तूफानों से लड़कर
हिम्मत कभी न हारा
कड़ी धूप में तपकर निखरा
शीशम रूप तुम्हारा

अजर अमर है इसकी काया
गुण सारे अनमोल
मूरख मानव इसे काटकर
मेट रहा भूगोल
पात पात से डाल डाल तक
शीशम सबसे न्यारा

धरती का यह लाल अनोखा
उर्वर करता आँचल
लकड़ी का फर्नीचर घर में
सजा रहे हैं हर पल
जेठ दुपहरी शीतल छाया
शीशम बना सहारा

सदा समय के साथ खड़ी थी
पत्ती औ शाखाएं
रोग निवारक गुण हैं इसमें
सत, अवसाद भगाएं
कुदरत का वरदान बना है
शीशम प्राण फुहारा

वृक्ष संचित जल से ही मानव
अपनी प्यास बुझाता
प्राण वायु की, धन दौलत का
खुद भक्षक बन जाता
हरियाली अनमोल धरोहर
शीशम करे इशारा

- शशि पुरवार
१ मई २०१९

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