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         गर्मी में जलजीरा

 
तन में- मन में भरे ताजगी
गर्मी में जलजीरा है

नींबू का शरबत पी लेना
दुख में हँस-हँसकर जी लेना
ऐसा ही कुछ-कुछ है करता
लाजवाब यह खीरा है

मौसम लू-लपटों का आया
आम कुतर तोते ने खाया
बहुमूल्य है सब रत्नों में
और दुर्लभ ये हीरा है

ठीक उमर से पत्ते झरते
छाया की देहों को हरते
देता है राहत इन आँखों को
जैसे कि ममीरा है

- अविनाश ब्यौहार
१ मई २०२६

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