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          दिन बचपन वाले

 
गर्मी के दिन बचपनवाले
खट्टी -मीठी यादें लाते
बड़े सवेरे उठकर हम सब
आमों के बागों में जाते

पक्षी दल अपनी धुन में ही
मीठे -मीठे राग सुनाते
भूख मिटाने वे सब मिलकर
कुतर-कुतर आमों को खाते

पेड़ों से वे नवल टिकोरे
कुछ भू गोदी में गिर जाते
उन्हें बीनकर झोले में भर
खुशी-खुशी हम घर को आते

दादी-माँ का पल्लू धरते
हम जिद जलजीरे की करते
अम्मा के हाथों का जादू
चटकारे अहसास कराते

- डॉ. मंजु गुप्ता
१ मई २०२६

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