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      यह शीतल मल्हार राग

 
बहुत चले हो तेज धूप में
प्यास लगी होगी थकान से
शीतल हो लो स्वाद भरे इस
जल-जीरे के मधुर पान से!

इसमें कच्चे अमुआ का रस
इसमें है नमकीन फुहारा
इसमें छौंक लगी जीरे की
यह सुस्वादु पेय हमारा
हर लेगा यह प्यास सभी की
होंठों पर रख गीत- गान से!

यह शीतल मल्हार - राग है
आ बरसेगी वर्षा रानी
शीतलता लायेगी तन में
अगम कुएँ का लेकर पानी
जुड़ जाएँगे तृषित -कंठ सब
मौसम के इस नीर - दान से!

यह जन- मन का पेय पुरातन
पी लो तो तर हो जाना है
फिर मीरा का मोहन के संग
दृश्य मनोहर गढ़ जाना है
गा लो फिर से गीत नया वह
वंशी की उस मधुर तान से !

- उदयशंकर सिंह उदय
१ मई २०२६

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