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         जीरा पानी से

 
लू लग जाए तब क्या करना
पूछो नानी से
ठंडक संग तरी मिलती है
जीरा - पानी से
बचकर के रहना ही होगा
मौसम गरम हुआ

खट्टी मिट्ठी कच्ची अँबिया
किसे नहीं भाती
धनिया चटनी जीभ चटोरी
छोड़ कहाँ पाती
उमस तपन में कटे दुपहरी
दिन बेशरम हुआ

कड़ी धूप में झुलसे जब जब
सूरज गरमाया
शीतल छाँव घनी निबिया ने
तन को सहलाया
बातों के चटखारे सुन सुन
रवि कुछ नरम हुआ

छकें शौक से कूलर वाले
मीठे मालपुए
अच्छे - अच्छे ठंडक के दिन
झपट रहे ठलुए
पुरवाई के होंगे झोंके
ऐसा भरम हुआ

काम न रोके प्रखर घाम में
मिलो फकीरा से
प्यासी प्यास बुझा पाया कब
वो जल जीरा से
खीरा ककड़ी आसमान पर
क्या युग धरम हुआ

--- प्रो. विश्वम्भर शुक्ल
१ मई २०२६

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