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        जलजीरा पीते ही

 
कोट उतारे मौसम ने
और सूर्यदेव मुस्काए
गर्मी का मौसम आया
तो सबके मन हुलसाए

सूरजमुखी लगे खिलने
बेले की खुशबू आए
गुलमोहर की छटा देखके
बुलबुल गाना गाए

पीले आम दशहरी, लंगड़ा
चौसा, हापुस, केसर
हम भी आए मंडी से
मीठे तरबूजे लेकर

सब्जी मंडी में बिकते फिर
लौकी, ककड़ी, खीरा
और पियें सारे मिलजुलके
खटमिट्ठा जलजीरा

बच्चों ने धावा बोला तो
दादी लाई डंडा
जलजीरा पीते ही सबका
होता तन मन ठंडा

- रेखा राजवंशी
१ मई २०२६

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