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         कजरारे बादल

 
 
पावस के कजरारे बादल
जमकर बरसे कारे बादल
उमस धरा की मिटा न पाए
बरस-बरस कर हारे बादल

घिरी घटा गहराये बादल
भर भर के जल लाये बादल
तीव्र ताप से तपी धरा पर
मधुर सुधा बरसाये बादल

सूरज से घबराए बादल
चढ़ी धूप छितराए बादल
उमड़-घुमड़ पहुँचे गिरि कानन
घन घट फट पछताए बादल

भली नहीं अतिवृष्टि बादल
करे याचना सृष्टि बादल
कहीं बाढ़ कहीं सूखा क्यों
समता की रख दृष्टि बादल

छोड़ भी दो मनमानी बादल
बहुत हुई नादानी बादल
बरसो ऐसा कि सब बोलें
पावस भली सुहानी बादल

- सुधा देवरानी
१ अगस्त २०२४

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