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        चैत्र मास के नयन खुल गए

 
चैत्र मास के नेत्र खुल गए
समय श्रमिक के हाथों में
आया फिर से हसिया

पकी फसल का लगा खींचने
सबको सम्मोहन
नव संवत स्वागत में
गृह गृह हुए ध्वजारोहण

चैत्र मास के नेत्र खुल गए
देख रही दुनिया

आँखों के आगे
आ नाचे तीज और त्योहार
शबरी अरु निषाद हित लेने
लगे राम अवतार
पुजी अष्टमी नवमी
मंदिर में बाजी घड़ियाँ

समय श्रमिक के हाथों में
फिर से आया हसिया

- गिरि मोहन गुरु
१ अप्रैल २०२६

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