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        उत्सव के नव रंग

 
चैत सुहाना लाया जग में उत्सव के नव रंग
खोला खाता पड़वा ने शुभ नव संवत्सर संग

आईं अंबे नवरात्रे में
लेकर माँ नौ रूप
भक्ति शक्ति से महकी माटी
मले प्रेम की धूप
दुख पीड़ा संकट तम हरके मैया करती दंग
चैत सुहाना लाया जग में उत्सव के नव रंग

कुंज कछारों बगिया वन में
महके प्रीत बसंत
आम्र कुंज में पिक पुकारती
मधु चैती में कंत
लिए फसल बैसाखी झूमे बजे खुशी की चंग
चैत सुहाना लाया जग में उत्सव के नव रंग

राम जन्म पर्व मनाए जन
पावन प्रभु का नाम
महावीर- हनुमान जयंती
करती भोर प्रणाम
मानवता की राह बताए संस्कृति सत्य तरंग
चैत सुहाना लाया जग में उत्सव के नव रंग

- डॉ मंजु गुप्ता
१ अप्रैल २०२६

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