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        चैत सिर्फ महीना नहीं

 
चैत्र सिर्फ़ एक महीना नहीं होता
वो कैलेंडर की पहली साँस है
जहाँ समय
नया नाम लेकर जन्म लेता है।

घर की चौखट पर
हल्दी और रोली से
छोटे-छोटे सूर्य बनाए जाते हैं
और माँ की उँगलियाँ
पूजा की थाली में
एक पूरा वर्ष सजा देती हैं।

नवसंवत्सर
धीरे से दस्तक देता है,
जैसे कह रहा हो
“जो बीत गया, उसे यहीं रख दो।

नवरात्रि में
घट के पास उगती जौ
सिर्फ़ हरियाली नहीं
वो विश्वास का अंकुर है
जो मिट्टी से ज़्यादा मन में
बोया जाता है।

चैत्र की सुबहें
मंत्रों की हल्की गूँज से खुलती हैं
और शामें दीयों की लौ में
थोड़ी और शांत हो जाती हैं।

यह वही समय है
जब परंपरा किसी किताब में नहीं,
घर के आँगन में जीती-जागती दिखाई देती है।

चैत्र
तुम हमें सिर्फ़ नया साल नहीं देते,
तुम याद दिलाते हो
कि जड़ों से जुड़े रहना भी
एक उत्सव होता है।

- प्रगति शंकर
१ अप्रैल २०२६

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