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        चैत्र मास का गीत

 
एक स्वर में सभी राम रामा कहें
स्वर्ण सी लालिमा पीत
सरसों लहें

ढोल की थाप पर थिरकते पाँव हैं
चैत के गीत से झूमते गाँव हैं
याद की आग में वो
जलें वो सहें

कूकती कोकिला कोपलें फूटतीं
सूर्य की रश्मियां व्योम से कूदती
साँझ को पूरवा की
हवा भी बहे

पावनी-सी सदा राम नवमी मने
राग से तान से गीत चैती बने
प्रेम की रीति से भीति
दंभी ढहे

- रश्मि सिंह
१ अप्रैल २०२६

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