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        यह महामास है

 
फागुन गया चैत आया है, अपना रंग जमाने
धरे कान पर हाथ लगे काका
चैता अब गाने !

डाल-डाल पर अमराई के उगने लगे टिकोरे
भरे मदन- रस से महुए के बदन हुए कुछ गोरे
खुली धूप में हँसती काकी
सबको लगी हँसाने!

खलिहानों से लगी नई फसलों की खुशबू आने
घर - आंगन में पहुंच रहे हैं नव गेहूँ के दाने
पीली सरसो में सोने के
रंग लगे भरमाने

औ' पूनम की रात चैत की शोभा कौन बखाने
झरने लगे दूध अंबर से धरती लगी नहाने
खिलने लगी कुमुदिनी
सरवर लगे मंद मुस्काने!

चैत मास यह महामास है सब मासों से न्यारा
राम- जन्म है इसी मास में पावन पर्व हमारा!
माँ दुर्गा भी इसी मास
आई आशीष लुटाने !

- उदय शंकर सिंह उदय
१ अप्रैल २०२६

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