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        अंग-अंग पीरा  

 
अंग -अंग होती पीरा है
राहत देता जलजीरा है

सूखी हुई नदी भी देखी-
गंगा मगर सदानीरा है

चारों ओर समंदर फैला-
देखो तो वहाँ जजीरा है

गर्मी में घर-घर है होता-
आम- पना या तो शीरा है

मंदिर-मंदिर में कीर्तन है-
ढोलक के साथ मजीरा है

- अविनाश ब्यौहार 
१ जुलाई २०२६

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